श्रीमती कै अन्नपूर्णा लक्ष्मण कांबळे
दीर्घ दुखण्याच्या मिषे | आप्त – पर लागत कसे ||
कोणकोण कसे कसे | अनुभवोत्तर कळतसे ||१||
बोल वरवर गोडसे |तथ्य त्यात न फारसे ||
भाव नयनी आरसे | उतु कृतीतून जातसे ||२||
साहचर्ये दिशी निशे | ओळखोनी पुरि असे ||
नाटका त्या नच फसे | मूळ सर्वा धन असे ||३||
त्यार्थ घाई होतसे | धीर लज्जा सुटसे ||
मारणी घालत विषे | बेत फिस कट ता रुसे ||४||
नाम शिव गा बय – पिसे | जप सहस्रो जगदिशे ||
शारदे , समपद पिसे | पाव हरि मुगुटी पिसे ||५||












